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ई-वे बिल क्या है?

अंतिम समीक्षा: लेखक: ewaybillogin संपादकीय टीम
सीधा जवाब

ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक वे बिल) सरकार के ई-वे बिल सिस्टम पर माल की ढुलाई के लिए बनाया जाने वाला दस्तावेज़ है। GST में आम तौर पर यह तब ज़रूरी होता है जब ₹50,000 से ज़्यादा मूल्य का माल भेजा जाए। इसमें माल, पक्षों और वाहन का विवरण होता है, और इसका 12 अंकों का नंबर होता है।

इस पेज पर
  1. ई-वे बिल का मतलब और फुल फ़ॉर्म
  2. कानूनी आधार
  3. ई-वे बिल कब ज़रूरी है?
  4. ई-वे बिल कौन बनाता है?
  5. ई-वे बिल में क्या होता है
  6. उदाहरण से समझें
  7. छूट: एक झलक
  8. ज़रूरी ई-वे बिल के बिना माल भेजने पर क्या होता है?
  9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ई-वे बिल का मतलब और फुल फ़ॉर्म

EWB का फुल फ़ॉर्म Electronic Way Bill (इलेक्ट्रॉनिक वे बिल) है। “वे बिल” वह दस्तावेज़ है जो माल के साथ चलता है। GST में इसकी जगह ऑनलाइन बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ने ले ली है, ताकि टैक्स अधिकारी माल को ज़्यादा देर रोके बिना उसकी जाँच कर सकें। राष्ट्रीय ई-वे बिल सिस्टम अंतर-राज्यीय (inter-state) ढुलाई के लिए 1 अप्रैल 2018 से लागू हुआ, और राज्य के अंदर की ढुलाई के लिए राज्यों में चरणबद्ध तरीके से।

कानूनी आधार

  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 68 सरकार को ढुलाई में माल के लिए दस्तावेज़ अनिवार्य करने का अधिकार देती है।
  • CGST नियम, 2017 का नियम 138 (नियम 138A से 138E के साथ) बताता है कि ई-वे बिल कब ज़रूरी है, कौन बनाता है, वैधता, जाँच और ब्लॉकिंग।

ई-वे बिल कब ज़रूरी है?

आम तौर पर माल भेजने से पहले ई-वे बिल ज़रूरी है जब कंसाइनमेंट मूल्य ₹50,000 से ज़्यादा हो, चाहे ढुलाई:

  • सप्लाई के लिए हो (जैसे बिक्री);
  • सप्लाई के अलावा किसी कारण से हो (जैसे जॉब वर्क के लिए माल भेजना या माल वापस करना); या
  • किसी अनरजिस्टर्ड व्यक्ति से इनवर्ड सप्लाई हो।

कुछ मामलों में ₹50,000 से कम पर भी ई-वे बिल ज़रूरी है, जैसे प्रिंसिपल द्वारा जॉब वर्कर को अंतर-राज्यीय माल भेजना, और रजिस्ट्रेशन से छूट प्राप्त व्यक्तियों द्वारा हस्तशिल्प माल की अंतर-राज्यीय ढुलाई। राज्य अपने अंदर की ढुलाई के लिए अलग सीमा तय कर सकते हैं। देखें ई-वे बिल की सीमा (अंग्रेज़ी में)।

आधिकारिक नियम / पोर्टल की जानकारी

नियम 138(1) के अनुसार ₹50,000 से ज़्यादा मूल्य के कंसाइनमेंट की ढुलाई शुरू होने से पहले ई-वे बिल की जानकारी देनी होती है।

स्रोत: CBIC GST पोर्टल: CGST नियम (स्रोत नए टैब में खुलेगा)

ई-वे बिल कौन बनाता है?

ई-वे बिल बनाने की ज़िम्मेदारी
स्थितिकौन बनाता है
रजिस्टर्ड सप्लायर माल भेजता हैसप्लायर (या प्राप्तकर्ता, या उनकी ओर से ट्रांसपोर्टर)
रजिस्टर्ड व्यक्ति अनरजिस्टर्ड सप्लायर से माल लेता हैप्राप्तकर्ता, जैसे वही सप्लायर हो
किसी पक्ष ने नहीं बनाया और माल ट्रांसपोर्टर को दिया गयाट्रांसपोर्टर, मिले दस्तावेज़ों के आधार पर
अनरजिस्टर्ड ट्रांसपोर्टर माल ले जा रहा हैपार्ट B अपडेट करने के लिए ट्रांसपोर्टर ID (अंग्रेज़ी में)

ई-वे बिल में क्या होता है

पार्ट A में कंसाइनमेंट का विवरण होता है: GSTIN, डिलीवरी स्थान, दस्तावेज़ नंबर और तारीख, मूल्य, HSN कोड और परिवहन का कारण। पार्ट B में परिवहन का विवरण होता है: सड़क के लिए वाहन नंबर, या रेल, हवाई या जहाज़ के लिए ट्रांसपोर्ट दस्तावेज़ नंबर। विस्तार से ई-वे बिल कैसे बनाएँ में।

उदाहरण से समझें

उदाहरण (काल्पनिक)

जयपुर की शर्मा टेक्सटाइल्स ₹1,20,000 (GST सहित) का कपड़ा दिल्ली की एक दुकान को बेचती है। ढुलाई अंतर-राज्यीय है और मूल्य ₹50,000 से ज़्यादा है, इसलिए ई-वे बिल ज़रूरी है।

  1. शर्मा टेक्सटाइल्स ई-वे बिल पोर्टल पर लॉगिन करके पार्ट A में इनवॉइस नंबर, तारीख, दोनों GSTIN, दिल्ली का PIN कोड, HSN कोड और मूल्य भरती है। दूरी लगभग 280 किमी है।
  2. ट्रांसपोर्टर का GSTIN या ट्रांसपोर्टर ID डाली जाती है, और पार्ट B में ट्रक नंबर जोड़ा जाता है।
  3. पोर्टल 12 अंकों का ई-वे बिल नंबर देता है। लगभग 280 किमी पर ई-वे बिल 2 दिन वैध है (पहले 200 किमी के लिए 1 दिन और अगले 80 किमी के लिए 1 और दिन)।
  4. ड्राइवर इनवॉइस और ई-वे बिल (या उसका नंबर) साथ रखता है। दिल्ली की दुकान अपने अकाउंट में ई-वे बिल देख सकती है और गलत होने पर 72 घंटे में अस्वीकार कर सकती है।

छूट: एक झलक

नियम 138(14) में ऐसी स्थितियाँ दी गई हैं जहाँ ई-वे बिल ज़रूरी नहीं। इनमें शामिल हैं:

  • बिना मोटर वाले वाहन से माल ले जाना;
  • कस्टम क्लीयरेंस के लिए पोर्ट, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स या लैंड कस्टम स्टेशन से इनलैंड कंटेनर डिपो या कंटेनर फ़्रेट स्टेशन तक माल;
  • नियम 138 के अनुलग्नक (annexure) में दिए माल, और अधिसूचना द्वारा टैक्स से छूट प्राप्त माल;
  • खाली कार्गो कंटेनर;
  • डिलीवरी चालान पर, वज़न के लिए व्यापार स्थल से 20 किमी तक के वेब्रिज तक माल ले जाना।

राज्य अपने अंदर की ढुलाई के लिए अपनी छूट भी अधिसूचित कर सकते हैं। किसी छूट पर भरोसा करने से पहले नियम 138(14) और अपने राज्य की अधिसूचनाओं का सही शब्द-विन्यास देखें।

ज़रूरी ई-वे बिल के बिना माल भेजने पर क्या होता है?

जिस माल के लिए ई-वे बिल ज़रूरी है, अगर वह बिना ई-वे बिल या गलत विवरण के साथ भेजा जाए, तो CGST अधिनियम की धारा 129 के तहत माल और वाहन रोके जा सकते हैं, और जुर्माना लग सकता है। छुड़ाने के लिए आम तौर पर लागू जुर्माना भरना होता है। रकम मामले पर निर्भर करती है, इसलिए ऐसा हो तो पेशेवर सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

EWB का फुल फ़ॉर्म क्या है?

EWB का फुल फ़ॉर्म Electronic Way Bill (इलेक्ट्रॉनिक वे बिल) है।

क्या ₹50,000 से कम के माल पर ई-वे बिल ज़रूरी है?

आम तौर पर नहीं, पर कुछ अपवाद हैं, जैसे जॉब वर्कर को अंतर-राज्यीय माल भेजना और कुछ हस्तशिल्प माल की अंतर-राज्यीय ढुलाई। राज्य के अंदर की सीमा भी अलग हो सकती है।

ई-वे बिल कहाँ बनता है?

आधिकारिक ई-वे बिल पोर्टल ewaybillgst.gov.in (या ई-वे बिल 2.0 पोर्टल) पर, या अधिकृत API/GSP इंटीग्रेशन से।

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आधिकारिक स्रोत और संदर्भ

हर समीक्षा से पहले हम ये स्रोत जाँचते हैं। पोर्टल की स्क्रीन और नियम बदल सकते हैं। अगर यहाँ लिखी बात पोर्टल से अलग लगे, तो पोर्टल की बात मानें और हमें बताएँ।

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